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| DIPANKAR DEBNATH |
◦ रचनाकार : व्यास ( कृष्ण द्वैपायन वेद व्यास)
◦ पिता ; पाराशर ऋषि
◦ माता ; सत्यवती
◦ (पालन मल्लाहों के राजा दासराज द्वारा हुआ)
◦ स्वरूप ; वर्तमान महाभारत में १०,०००० श्लोक है
◦ अपरनाम ; शत-साहस्त्री संहिता
◦ क्रम ; व्यास ! वैशम्पायन (जय =८८०० श्लोक)
◦ वैशम्पायन ! जनमेजय (भारत = २४०००श्लोक)
◦ जनमेजय ! सौति ! शौनक (महाभारत =१०, ००००श्लोक)
◦ रस ; शांत रस ।
◦ शैली ; पाञ्चाली।
1. विष्णुसहस्त्रनाम (अनुशासन पर्व)
2. अनुगीता (अश्वमेध)
3. भीष्मस्वराज
4. गजेन्द्रमोक्ष
5. श्रीमद्भगवतगीता (भीष्म पर्व)
१८ पर्वों केनाम
1. आदिपर्व
2.सभापर्व
3. वनपर्व
4. विराटपर्व
5. उद्योगपर्व
6. भीष्मपर्व
7. द्रोणपर्व
8. कर्णपर्व
9. शल्यपर्व
◦ 10 सौप्तिकपर्व
◦ 11 स्त्रीपर्व
◦ 12 शान्तिपर्व
◦ 13 अनुशासनपर्व
◦ 14 अश्वमेधपर्व
◦ 15 आश्रमपर्व
◦ 16 मौसलपर्व
◦ 17 महाप्रस्थानपर्व
◦ 18 स्वर्गारोहणपर्व
◦ बडा पर्व = शान्तपर्व(१४०००श्लोक )
◦ छोटा पर्व= महाप्रस्थानिक पर्व(११५ श्लोक)
◦ १ आदिपर्व= १९ उपपर्व, २३३ अध्याय ( ९००० श्लोक)
◦ २ सभापर्व= २२उपपर्व, ८१ अध्याय
◦ ३ वनपर्व= २२उपपर्व, ३१५ अध्याय
◦ ४ विराटपर्व= ५उपपर्व, ७२ अध्याय ( २७००श्लोक)
◦ ५ उद्योगपर्व= १० उपपर्व, १९६ अध्याय ( ७१००श्लोक)
◦ ६ भीष्मपर्व= ५ उपपर्व, १९६ अध्याय ( ६१०० श्लोक)
◦ ७ द्रोणपर्व= ८ उपपर्व, २०२ अध्याय (१०००० श्लोक)
◦ ८ कर्णपर्व= उपपर्वनही है, ९६ अध्याय (५००० श्लोक)
◦ ९ शल्यकर्म= २ उपपर्व, ६५ अध्याय ( ३७०० श्लोक)
◦ १० सौप्तिकपर्व= १ उपपर्व, १८ अध्याय ( ८१० स्लोक)
◦ ११ स्त्रीपर्व= ३ उपपर्व, २७ अध्याय (८२० श्लोक)
◦ १२ शान्तिपर्व= ३ उपपर्व, ३६४ अध्याय (१४७२५ श्लोक)
◦ १३ अनुशासनपर्व=२ उपपर्व, १६८ अध्याय (१०, ००० श्लोक)
◦ १४ अश्वमेधपर्व= १२ अध्याय, (प्रायः सवा चार सहस्त्र श्लोक)
◦ १५ आश्रमपर्व= ३ उपपर्व, ३१ अध्याय (११०० श्लोक)
◦ १६ मौसलपर्व= ८ अध्याय, (३०४ श्लोक)
◦ १७ महाप्रस्थानपर्व= ३ अध्याय (११५ श्लोक)
१८ स्वर्गारोहणपर्व= ५ अध्याय, (२२०श्लोक)
◦ १८ दिन युद्ध चला तथा ४ सेनापति रहे।
◦ भीष्म = १० दिन तक
◦ द्रोण = ५ दिन तक
◦ कर्ण = २दिन तक
◦ शल्य = १ दिन तक
◦ अज्ञातवास समय पाण्डवों केनाम –
◦ वैयादघ्रपद= युधिष्ठिर
◦ वल्लभ = भीम
◦ बृहन्नला = अर्जुन
◦ ग्रन्थिक = नकु ल
◦ अरिष्टनेमि =सहदेव
◦ सैरन्धी = द्रौपदी
महाभारत केमहत्वपूर्णअख्यान
1. कद्रू विनतोपाख्यान =आदिपर्व
2. शकुन्तलोपाख्यान = आदिपर्व
3. ययात्युपाख्यान = आदिपर्व
4. शिशुपालोपाख्यान = सभापर्व
5. मत्स्योपाख्यान = वनपर्व
6. नलोपाख्यान = वनपर्व
7. शिव्युपाख्यान = वनपर्व
8. रामोपाख्यान = वनपर्व
9. सावित्र्युपाख्यान =वनपर्व
10.अम्बोपाख्यान =उद्योगपर्व
महाकाव्यम्
1. शिशुपालवध = माघ
2. नैषधीयचरितम्= श्रीहर्ष
3. किरातार्जुनीयम्=भारवि
◦ नाटक
◦ दूतघटोत्कचम्, दूतवाक्यम्, कर्णभारम्, मध्यमव्यायोगम्, पञ्चरात्रम्, ऊरुभङ्गम् = भास
◦ अभिक्ज्ञानशाकुन्तलम्= कालिदास
◦ वेणीसंहारम्= भट्टनारायण
◦ बालभारतम्= राजशेखर
चम्पूकाव्यम्
नलचम्पू = त्रिविक्रमभट्टः
भारतचम्पू= अनन्तभट्ट
पाञ्चालीस्वयम्बरचम्पू = नारायणभट्ट
द्रौपदीपरिणयचम्पू= चन्द्रकवि
साहित्यिक महत्त्व
गुण = ओज, प्रसाद, माधुर्य।
रस = शान्तरस (कही कही वीर तथा बीभत्स)
रीति = पाञ्चाली
अलङ्कार = शब्दालङ्कार, अर्थालङ्कार का मिश्रण
छन्द = मुख्य छन्द अनुष्टुप , परन्तुयत्र तत्र अन्य का भी प्रयोग
भाषाशैली = सरल, सुबोध, प्रभावोत्पादक।

